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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 4
मुस्तुफस्तु महामानी विज्ञङ्गरूरजिघृक्षया। स्यान्नृपं तानजितं डुरान्वयधुरन्धरम्।। तथा विठ्ठलगोपाले विप्रं क्षात्रोपजीविनम्। प्रौदं फरादखानं च सद्यः प्रस्थातुमादिशत्।।
अभिमानी मुस्तफखान ने बैंगलोर को त्वरित अधिग्रहीत करने की इच्छा से डूरे वंश के प्रमुख तानाजी राजा को एवं क्षत्रियवृत्ति से रहने वाले ब्राह्मण विठ्ठल गोपाल को तथा प्रौढ फरादखान को शीघ्र प्रस्थान करने का आदेश दिया।
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