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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 23
सुषिरान्वेषणपरः परस्पर्धाकरः खलः । आहितोप्यहितो ज्ञेयो नावज्ञेयो विजानता ॥
दोषदर्शी शत्रु, दूसरे के साथ स्पर्धा करने वाला दुष्ट, इनको सांप से भी अधिक अहितकारी जानना चाहिए, जानते हुए भी इनकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
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