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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 21
द्विषि विश्वसता येन नीतिशाखं न तत्स्मृतम् । किं तेन खदिरा‌ङ्गारपर्यङ्कशयनं कृतम् ॥
शत्रु पर विश्वास करके जिसका पूर्णतया राजनीति शास्त्र विस्मृत हो गया है, उसका क्या उपयोग है? क्या उसने खदिर के अंगारे से युक्त पलंग पर शयन किया हैं?
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