हालाहलधरा श्लेषो हालाहलनिषेवणम्।
विद्विषत्सु च विश्वासस्त्रयमेतत्समं स्मृतम् ॥
सांप को पकड़ना, हलाहल विष का पान करना एवं शत्रु पर विश्वास करना ये तीनों वृतान्त समान ही हैं।
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