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शिवभारतम् • अध्याय 13 • श्लोक 14
अतिविश्वब्धतां नीत्वा विप्रलब्धो मरुत्वता। पपात त्रिदिवात्तूर्णं ययातिर्नहुषात्मजः ॥
नहुष के पुत्र ययाति का, इन्द्र ने अपने ऊपर अत्यधिक विश्वास करवाकर उसे फंसा दिया तो वह स्वर्ग से शीघ्र ही नीचे गिर गया।
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