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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 58
अमीभिः संवर्तानलनिभबलैर्मुस्तुफमुखैः । चम्पालैः कालैरिव युधि निलिंपाधिपबलम्। अमुं शाहे साहंकृतिमितिनितान्तं नियमितम्, स्वदूतेभ्यः श्रुत्वा महसि महमूदेन मुमुदे ।। इत्यनुपुराणे कवीन्द्रपरमानन्दप्रकाशितायां संहितायां द्वादशोऽध्यायः ॥
प्रलयकाल के अग्नि के समान, प्रचंड एवं यमराज की तरह क्रूर ऐसे उस मुस्तुफाखान आदि सेनापति इंद्र की तरह पराक्रमी उस अभिमानी शहाजी राजा को युद्ध में कैद किया है, ऐसा अपने दूत से सुनकर महमूद आदिलशाह अत्यंत आनंदित हुआ।
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