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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 56
इति तं यवनं तत्र जगहें जनताभितः। स तु स्वस्वामिकार्यार्थी कृतकृत्योभवत्ततः ।।
इसलिए वह जनता उस यवन की सर्वत्र निंदा करने लगी, परंतु वह स्वामिकार्य का इच्छुक मात्र कृतकृत्य हो गया।
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