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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 52
निश्वसतं निजग्राह नागं जाङ्गुलिको यथा। ततो हस्तिनमारोप्य नीयमानमरातिभिः ।।
जैसे गरुड फुस फुस करने वाले सांप को पकडता है, वैसे ही वास प्रश्वास ग्रहण करने वाले उस महाबाहु शहाजी राजा को शत्रु, हाथी पर डालकर ले गये।
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