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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 50
अथारिपातितापारहेतिपातपतापतान्। तूर्णमुत्पत्य तुरगादुरगारातिचेष्टिते ।। शराचितशरीरोत्थलोहितद्रवलोहिते। प्रभूतप्रधनोद्धतपरिश्रमविमोहिते ।। महाराजे महाबाहौ परिरब्धमहीतले। क्ष्वेडितास्फोटितावेशपरे च परमण्डले ।। हाहाकारस्तदात्युच्चैरभूद्धार्शवले बले । तत्र धर्मधनं धीरं धर्मराजसमश्रियम्।।
शीघ्र ही घोडे से कूदकर गरुड की तरह झडप करने वाले तथा बाणों से विदीर्ण हुए शरीर से बहनेवाले रक्त से लथपथ एवं बहुत देर तक युद्ध करने के परिश्रम से मूर्च्छा को प्राप्त हुए, ऐसे महानाहु शहाजी राजा के भूमि का आलिङ्गन करने पर, शत्रुसमूह गर्जना करने लगा एवं भुजाओं को बजाने लगा और भोसले के सैनिकों में बड़ा हाहाकार मच गया।
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