तत्पश्चात् खंडोजी, अंबाजी, मनाजी ये मित्र तथा अन्य सैनिकों सहित, ओर तलवारों, धनुषों, भालों, बंदुकों एवं चाको को धारण करने वाले पुरुषों से घिरा हुआ वह घोरकर्मा महाबाहु बाजराज घोरपडे, मानो दूसरा वडवानल ही हो ऐसा यशवंतराव वाढवे, पवार कुल के दीपक मालोजी राजा, विख्यात तुकोजी राजा, राजा भोसले ऐसे ये सभी बलिष्ठ सेनापति अपने बैठे हुए घोडो के सुरों से पृथ्वी को चूर्ण करते हुए शहाजी के शिबिर में प्रविष्ट हुये।
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