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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 47
तदानीं शाहराजेन शरैः स्वैः शकलीकृताः । स्रस्तबाहुलतास्तत्र सवल्लोहितलोहिताः ॥ चण्डवाताहतास्सद्यः पुष्पिता इव किंशुकाः। शतशस्सैनिकाः पेतुः बाजराजस्य पश्यतः ।।
उस समय शहाजी राजा ने अपने बाणों से जिसके तुकडे तुकडे कर दिये थे, जिनकी भुजाएं तुटकर गिर गई थी, जो शरीर से बहने वाले खून से लथपथ थे, ऐसे सैकडों सैनिक, जैसे प्रचंड वायु के प्रहार से सथः पुष्पित पलस के वृक्ष उखडकर गिर जाते उसी प्रकार सैनिक बाजराज के सामने गिर गये।
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