बाजराजस्तु विक्रान्तस्तैर्नितान्तशितैश्शरैः ।
शीर्यमाणशरीरोपि न मुमोह महोर्मिभिः ॥
परतु पराक्रमी बाजराज, उस अत्यंत तीक्ष्ण एवं वेगवान् बाणों की वर्षा से छिन्न भिन्न होते हुए भी अचेत नहीं हुआ।
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