तीक्ष्ण बाणों से छिन्न भिन्न हुए घोडों के, हाथियों के, और मनुष्यों के कटे हुए शरीर से निकले रक्त का तालाब बन गया, मज्जा, मांस, चरबी, मेद, इनका पृथ्वी पर किचड बन गया, नाचने वाले पिशाचियों के साथ डाकिनी के कुल को अत्यंत हर्ष हुआ, अनेक सेनापतियों के कुंडलों को धारण करने वाला भैरवमंडल भैरवी के साथ अत्यंत मदमस्त हो गया, सूर्य के किरणों को भेद करके वीरों के मस्तकों की माला से सुशोभित शंकर को भूतगणों के साथ अत्यंत आनंद हुआ, खंडोजी राजा ने दत्तराज के हाथ तोड दिये, अहो! त्र्यंबकराज को मानाजी ने जीत लिया, उसी प्रकार अंबाजी के द्वारा किए गए प्रहार से भयभीत मेघाजी पीछे हट गया, दसाजी भी भाग गया, अगस्त्य मुनि द्वारा पीये हुए समुद्र की तरह अन्य सैन्य भय से आकुल होकर नष्ट हो गया, उसी प्रकार मलोजी के बाणों से भांडकर पीडित हो गया, ऐसी अवस्था देखकर शहाजी राजा ने बाजराज घोरपडे पर अपने तीक्ष्ण बाणों की वर्षा की।
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