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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 40
यस्य येन शिरश्छिन्नं यद्यदङ्गमपात्यत । तस्य तत्तत्तदोत्पत्य बत तं प्रत्यधावत ॥
जिसका जिसने सिर एवं जो जो अवयव तोडकर नीचे गिराया, उसका वह वह अवयव उस समय उड़कर उस तोडने वाले पर दौडकर गया।
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