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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 39
शरासनानि कर्षतः सांगुलीयकपाणयः । पृथुस्कंधाः कबन्धाश्च प्रत्यधावन्नितस्ततः ॥
धनुष को खींचने वाले, जिनके हाथ में अंगुठियां थी, जिनके विस्तृत कन्धे थे, ऐसे राक्षसविशेष इधर उधर एक दूसरे पर दौडने लगे।
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