शिरांसि सशिरस्त्राणि सतनुत्राण्युरांसि च । पाणयस्सतलत्राश्च सकेयूराच बाहवः ॥
सपताको ध्वजचापि सशरं च शरासनम् । हयश्च सहयारोहः करी च सनियन्तृकः ॥
इमानि द्विषदुन्मुक्तशस्वच्छिन्नान्यनेकशः । तदानीमपतन् भूमौ पक्षयोरुभयोरपि ॥
शिरस्त्राणों सहित सिर, कवचों के साथ वक्षःस्थल, दस्तानों सहित हाथ, केयूर सहित भुजाएं, पताकों के सहित ध्वज, बाणों के साथ धनुष, घुडसवारों सहित घोडे, महावतों सहित हाथी, ये दोनों पक्षों के अनेक मनुष्य, शत्रुओं के द्वारा फेंके गये अनेक शस्त्रो से छिन्न-भिन्न होकर उस समय भूमि पर गिरने लगे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।