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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 36
पत्तिभिः पत्तयस्तत्र सप्तिभिस्सप्तयस्तथा । द्विपैर्द्विपाश्च बहवः ससंजुर्विजिगीषया ॥
पदातियों के साथ पदाति, घुडसवारों के साथ घुडसवार, महावतों के साथ महावत, ऐसे अनेक योद्धा विजय की इच्छा से परस्पर भीड गये।
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