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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 35
टंकार्य चापमन्योन्यं जिगीषन्तो मदोत्कटाः । रणरङ्गे नटन्ति स्म वटा इव महाभटाः ॥
परस्पर जीतने की इच्छा वाले वे मदमस्त महावीर धनुष की टंकार करके रणभूमि पर चमगादड की तरह नाचने लगे।
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