ततः त्र्यंबकराजेन चापहस्तेन मानजित् । खलखंडजिता दत्तराजेनापि च खंडजित् ॥
प्रतिमल्लजिता योगजिता च सहमल्लजित् । तथा मेघजिता मेघनादसाम्यभूतांबुजित् ॥
युयुधे शाहराजेन बाजराजः पराक्रमी। अन्ये चान्यैश्च बहवो बहुभिर्दीर्घबाहुभिः ॥
तत्पश्चात धनुर्धारी त्र्यंबकराज के साथ मानाजी, दुष्टों को जीतने वाला दत्तराज के साथ खंडोजी, शत्रु योद्धाओं को जीतने वाला योगाजी के साथ मालोजी, उसी प्रकार इंद्रजित के समान मेघाजी के साथ अंबाजी और शहाजी के साथ पराक्रमी बाजराज और दूसरे अनेक दीर्घबाहु वीरों के साथ दूसरे अनेक वीर लडने लगे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।