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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 33
तदा त्र्यंबकदत्ताह्रौ राजानी दशजित्तथा। मेघजिच्च महाबाहुर्महासेनसमप्रभः ॥ योगजिच्च तथान्येऽपि गुञ्जावटकरादयः । प्रत्यगृह्णन् प्रतिभटान् शाहराजपरीप्सया ॥
तब त्र्यंबकराज एवं दत्तराज, दसाजी एवं कार्तिकेय के समान तेजस्वी महाबाहु मेघाजी, योगाजी एवं गुंजावट आदि दूसरे वीरों ने शहाजी राजा की रक्षा करने की इच्छा से शत्रु योद्धाओं पर आक्रमण किया।
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