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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 32
अथ घोरपटैर्घोरवज्रनिर्घोषघोषिभिः । अभ्येत्य ज्ञापितस्वस्वनामभिः प्रौढधामभिः ॥ चारुचर्मभिरामुक्तवर्मभिः कृतकर्मभिः । परिवव्रतरां शाहस्तोयदैरिव चंद्रमाः ॥
आकाशीय विद्युत की भयंकर कडकडाहट के समान गर्जना करते हुए समीप जाकर, अपने अपने नाम बताकर चमकदार एवं सुंदर ढाल को धारण किए हुए, कवचधारी, युद्धकुशल, घोरपडे आदि सेनापतियों ने जैसे बादल चंद्रमा को घेरता है उसी प्रकार उन्होंने पूरी तरह शहाजी को घेर लिया।
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