न सेहे बाजराजेन शाहराजस्य गर्जितम् ।
प्रमत्तेन द्विपेनेव प्रमत्ताद्वपबृंहितम् ॥
मदमस्त हाथी की गर्जना को जैसे मदमस्त हाथी सहन नहीं करता है, उसी प्रकार बाजराज घोरपडे को शहाजी राजा की गर्जना सहन नहीं हुई।
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