शाहस्य तेन नादेन पूरिताः ककुभोऽभवन्।
प्रतिदध्या न चाम्भोधिः सपदि क्षुभितोऽभवत्।।
शहाजी के उस गर्जना से दिशाएं पूरित हो गई एवं समुद्र से भी उसकी प्रतिध्वनि निकलने से वह अचानक क्षुब्ध हो गया।
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