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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 27
आभीरराजो दशजिद्दशदिग्जकारकः। योगजिच्च धनुः काण्डधरो भाण्डकरान्वयः ।। गुन्जावटकरः सन्तो मेघजिड्डुक्कुरस्तथा। भ्राता त्र्यंचकराजय दत्तराजच दर्पितः ॥ अन्येऽप्यनीकपतयः शाहराजं समन्ततः । जुगुपुः शतशस्तत्र पृष्ठगोपाश्च भूरिशः ।॥
दसों दिशाओं का विजेता, ग्वालों का राजा दसोजी, धनुष एवं बाण को धारण करने वाला योगाजी भाडकर, संताजी गुंजावटकर, मेघाजी ठाकूर, भाई त्र्यंबकराज एवं अभिमानी दत्तराज, इन्होनें एवं अन्य सैकडों सेनापतियों ने एवं अनेक पृष्ठभाग के रक्षकों ने चारों ओर से शहाजी राजा की रक्षा की।
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