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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 22
तेनाघातेन महता प्रहृतायतवक्षसि। बाजराजे महाबाही मोहमुद्रामुपेयुषि ।। अंबुजित् परिघं घोरं मानजिन्मुद्ररं तथा। मल्लजिच्च सितां शक्तिं शिखां शेखावतीमिव।। बलजित् भल्लमतुलं जसवन्तश्च सायकम्। खंडजिच्च प्रचिक्षेप खड्गं खञ्जितं प्रति ।।
विशाल छाती पर किए गए उस जोर के प्रहार से महाबाहु बाजराज घोरपडे के मूर्च्छित होने पर अंबाजी ने भयंकर लोहबद्ध दंडा, मानाजी ने मुगर, मालोजी ने अग्नि के लपेटों जैसी कालीशक्ति, बालाजी ने अप्रतिम भाला, जसवंत ने बाण और खंडोजी ने तलवार ऐसे ये शस्त्र खंडोजी पाटील के शरीर पर फेंक दिये।
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