इधर शहाजी के शिबिर में हाथी पर जीन चढ़ाए नहीं थे, घोड़े को काठी नहीं पहनाई थी, सैनिकों के वल सज्ज नहीं थे, सेनापति अभी अभी सो कर उठे थे, रात्रि के जागरण से चौकीदार अतिशय तन्द्रा में थे, इस कारण अनेक प्रकार से भयभीत होकर अचानक उस शिबिर में भगदड़ मच गई।
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