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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 17
सविपक्षविनिर्मुक्तविशिखक्षतविग्रहः। शुशुभे लोहितार्द्रागो लोहिताङ्ङ्ग इव अहः ॥
शत्रुओं के द्वारा छोडे गए बाणों से जिसका शरीर क्षत विक्षत हो गया है, ऐसा खून से सना हुआ वह मंगलग्रह के समान सुशोभित होने लगा।
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