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शिवभारतम् • अध्याय 12 • श्लोक 15
कुप्यता पविहस्तेन पर्वता इव पातिताः। प्रतिप्रतीकं त्रुट्यन्तः पेतुरुर्ष्यामनेकशः ॥
क्रोधित इंद्र ने अपने वज्र से गिराये हुए पर्वत के समान, प्रत्येक योद्धाओं के अवयव तुटकर भूमि पर गिरने लगे।
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