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शिवभारतम् • अध्याय 11 • श्लोक 4
प्रसूनमिव संप्राप्य प्रणयी प्रणतिस्पृशा। शिरसा प्रतिजग्राह जगदेवोऽस्य शासनम् ।।
शरणागत जगदेव ने प्रणाम करके इसके शासन को फूलों की तरह सिर पर धारण किया।
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