मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 11 • श्लोक 38
सज्जीभूय निजे निजेऽद्य शिबिरे तिष्ठन्त्यनीकधिपाः । सार्थ वैर्व्यदधन्निप्तार्थसमये मन्त्र चिरं मुस्तुफः। आगत्येति निवेदितं प्रणिधिभिः श्रुत्वातिसत्वाधिको। वैवायत्ततया न शाहनृपति चक्रे तदात्वोचितम्।। इत्यनुपुराणे कवीन्द्रपरमानन्दप्रकाशितायां संहितायां एकादशोऽध्यायः ।।
जिनके साथ मध्यरात्रि में मुस्तुफाखान ने बहुत समय तक मन्त्रणा की थी, वे सेनानायक अपने-अपने शिविरों में तैयार होकर स्थित है, इस प्रकार गुप्तचरों के द्वारा आकर बताने पर उसको सुनकर भी अत्यन्त बलशाली शहाजी राजा ने दुर्भाग्य से तत्काल उचित कार्य नहीं किया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें