मुहुरभ्यर्णमभ्येत्य घूको घूत्कारमातनीत्।
तथा वृकगणः क्रूरमारवं सहसाकरोत् ।।
बारंबार अत्यन्त समीप आकर उल्लु घूत्कार की आवाजे करने लगे, उसी प्रकार लोमडियां अचानक भयंकर आवाज करने लगी।
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