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शिवभारतम् • अध्याय 11 • श्लोक 32
अओदराद्विनैवानं करकाः परितोऽपतन् । विनैवांभोधरं व्योम्नः प्रादुरासीदिरम्मदः ॥
बादलों के बिना ही आकाश से ओले चारों ओर गिरने लगे, बादलों के बिना ही आकाश में आकाशीय विद्युत चमकने लगी।
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