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शिवभारतम् • अध्याय 11 • श्लोक 30
सप्तयो दृक्पयोऽमुञ्चन्नरणन् करुणं गजाः। अतर्कितमभज्यंत कूरारवकृतो ध्वजाः ॥
घोड़े आंसु बहाने लगे, हाथी करुण स्वर निकालने लगे, ध्वज क‌ङ्कङ् ध्वनि करके अचानक टूटने लगे।
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