न बांधवो न च सखा न संबंधी न सोदरः।
पिताप्यनुरोद्धव्यः स्वामिसेवापरात्मभिः ।।
स्वामी की सेवा में आसक्त लोगों के द्वारा संबंधियों, मित्रों, बांधवों, सगे भाई एवं पिता का भी अवधान नहीं करना चाहिए।
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