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शिवभारतम् • अध्याय 11 • श्लोक 21
न महत्वं विना विद्यां न काव्यं प्रतिभां विना। कदाचिदपि नाभीष्ट दृष्टं स्वामिकृपा विना।।
विद्या के बिना महानता नहीं, प्रतिभा के बिना काव्य नहीं, उसी प्रकार स्वामी की कृपा के बिना अभीष्ट कार्य की सिद्धि नहीं देखी।
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