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शिवभारतम् • अध्याय 10 • श्लोक 8
एवमाविर्भवद्धार्दभरे देवे कपर्दिनि । प्राबुध्यत धरापालो मुहूर्ते ब्रह्मदैवते ।।
इस प्रकार शंकर के अंतःकरण में प्रेम के आविर्भूत होने से वह राजा ब्रह्म मुहूर्त में ही जागृत हो गया।
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