मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 10 • श्लोक 6
ईश्वर उवाच - सूर्यवंश्य महाबाहो शहाराज महामते। समाकर्णय मद्वाचमिमां कुशलमस्तिते ।। य एष भ्राजतेभ्यर्णे कनीयांस्तनयस्तव। तमेनं लक्षणोपेतमवेहि पुरुषोत्तमम्।।॥ वर्धमानः क्रमेणैव त्वत्पुत्रोयमुरुक्रमः । समाक्रम्यावनीं सर्वां यवनान्निहनिष्यति ।। इयं भगवती देवी गिरिजा भक्तवत्सला। समये समयेभ्येत्य तमिमं पालयिष्यति ।। हर्ता धरित्रीभाररी संहर्ता प्रतिभूभृताम्। मद्भक्त एष सर्वेषामप्यधुष्यो भविष्यति।। तस्मादमुं महाबाहुं महाशयशिवाह्वयम्। पुण्यदेशाधिपत्येन महनीयेन योजय ।।
हे सूर्यवंशी महाबाहु, बुद्धिमान शाहजीराजा! मेरे इन वचनों को ध्यान से सुनो इसमें ही तुम्हारा कल्याण हैं। यह जो तेरा छोटा बेटा तेरे समीप सुशोभित हो रहा है उसको शुभ लक्षणों से युक्त भगवान विष्णु है ऐसा जानो। यह तेरा पुत्र विष्णु धीरे-धीर वृद्धि को प्राप्त होता हुआ संपूर्ण पृथ्वी पर आक्रमण करके यवनों का संहार करेगा और यह भक्तवत्सला पार्वती देवी समय-समय पर समीप आकर उसकी रक्षा करेगी। पृथ्वी के भार का हरण करने वाला एवं शत्रु पक्ष के राजाओं का संहार करने वाला यह मेरा भक्त सभी के लिए अजेय होगा इसलिए हे महाशय! इस शिवाजी नाम के महाबहु को पुणे प्रांत की बड़ी जिम्मेदारी सौंप दो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें