ततः स भगवान् भर्गः स्वभक्तमवनीश्वरम्।
वचनेनानुजग्राह निरवग्रहशक्तिभूत्।।
तत्पश्चात अप्रतिष्ठित शक्ति वाले शंकर अपने भक्त शाहजीराजे पर अनुग्रह करके बोलें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।