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शिवभारतम् • अध्याय 10 • श्लोक 5
ततः स भगवान् भर्गः स्वभक्तमवनीश्वरम्। वचनेनानुजग्राह निरवग्रहशक्तिभूत्।।
तत्पश्चात अप्रतिष्ठित शक्ति वाले शंकर अपने भक्त शाहजीराजे पर अनुग्रह करके बोलें।
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