दृष्ट्वा तमीश्वरं साक्षात् स्वयं समभिवन्द्य सः।
पुरोवद्धाञ्जलिपुटस्तिष्ठति स्मातिनिर्वृत्तः ॥
उस शंकर को प्रत्यक्ष देखकर स्वयं ने उसका वंदन किया और अतिशय आनंद को प्राप्त होता हुआ वह हाथ जोड़कर उसके सामने खड़ा हो गया।
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