कवींद्र बोलें - एक बार भगवान शंकर की पूजा करके पुण्यवान शाहजी राजा सुखशय्या पर सो रहे थे तब जिसके पंचमुख प्रसन्न है, जिसको दस हाथ एवं तीन आंखें हैं, जो गंगाजल से स्निग्धता को प्राप्त हुई जटा के संयोग से मनोहर दिख रहा है, जिसके मस्तक पर अर्धचंद्राकार दिख रहा है, जिसके कपाल को त्रिपुंडू के संयोग से शोभा प्राप्त हुई है, जिसका कंठ मरकतमणि के सामान हरा है, जिसने सांपों के आभूषण पहन रखे हैं, जिसने अनेक प्रकार के शखों को धारण किया हुआ है, जो वरदाता, अभयदाता एवं बलशाली है, जिसने व्याघ्र चर्म को ओढ़ रखा है एवं गज चर्म को पहन रखा है, जो सर्व मुक्ति का आदि कारण है और सभी ऐश्वयों का खजाना है, जिसको इंद्र विष्णु आदि देव नमन करते हैं, योगियों में सर्वश्रेष्ठ योगी है ऐसे त्रिपुरारी शंकर को सभी लोकों के साथ एवं पार्वती के साथ स्वप्न में वर्तमान देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया।
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