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शिवभारतम् • अध्याय 10 • श्लोक 23
प्रादुर्भवत् प्राग्भवसंस्तवाभ्याम्। मिथोनुकूलत्वमुपगताभ्याम्।। अधत्त ताभ्यामथदम्पतीभ्याम्। संभूय शोभां महतीं त्रिवर्गः ॥ इत्यनुपुराणे सूर्यवंशे निवासकरपरमानन्दप्रकाशितायां संहितायां दशमोऽध्यायः ॥
पूर्व जन्म से ही परिचित होने से एवं पुनः इस युगल के एकत्र आ जाने से उन दोनों में परस्पर प्रेम उत्पन्न हो गया और फिर धर्म अर्थ एवं काम इन तीन पुरुषार्थों के भी इस युगल में एकत्र आ जाने से वे अत्यधिक सुशोभित होने लगे।
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