मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 10 • श्लोक 21
तमुल्लंधितकौमारमुद्भवन्नवयौवनम्। मीनकेतनलावण्यश्रीविलासमनोहरम् ।। सती शीलवती रम्यरूपा चातिगुणोज्वला। अभजद् भूपति भार्या प्रवारकुलसम्भवा ।।
कौमार अवस्था की समाप्ति पर जिसमें नवयौवन प्रस्फुटित हो रहा है और जिसके अंग कामदेव जैसे लावण्य विलसित होकर मनोहर है ऐसे उस शिवाजी राजा को सती, शीलवती, रमणीय रूपवती एवं अत्यंत गुण शालिनी पवार कुल में उत्पन्न पत्नी प्राप्त हुई।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें