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शिवभारतम् • अध्याय 10 • श्लोक 18
श्रयन्तः प्रश्नयोपेतं गुरवस्तं गुणैस्मह। अनन्यनिष्ठमनसः समगच्छन् कृतार्थताम् ।।
उस विनयशील एवं गुणवान शिवाजी के अधीनस्थ गुरुजन कृतार्थ हो गए क्योंकि उनके द्वारा सिखाई हुई, सर्व विद्याओं एवं कलाओं में वह शिवाजी निपुण हो गया।
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