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शिवभारतम् • अध्याय 1 • श्लोक 85
जनाय याचमानाय ददानः स तदा प्रभुः। ददृशे मनुजैस्साक्षात् कल्पद्रुम इवापरः ।।
उस समय वह लोगों को कल्पवृक्ष के समान प्रतीत हुआ।
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