प्रीतात्मा च निजामोऽपि निजमन्तिकमागती।
तावुभौ पूजयामास सामदानेन भूयसा ।।
उनके आगमन से संतुष्ट होकर निजामशाह ने भी उन्हें साम, दान इत्यादि से उन दोनों को सम्मानित किया।
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