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शिवभारतम् • अध्याय 1 • श्लोक 58
तमुन्नतं नमन्ति स्म सामन्ताः पृथिवीभृतः । समीरणसमुद्वेलं वंजुला इव वारिधिम्।।
जैसे लहरें हवा के कारण किनारे से उठती हुई समुद्र को नमन करती (झुकती) हैं, वैसे ही उन सामन्त राजाओं ने उस समृद्ध मालवर्मा राजा को नमन किया।
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