अग्निहोत्राणि सत्राणि यज्ञास्सुबहुदक्षिणाः।
महादानान्यपि तथा राष्ट्रे तस्य सदाऽभवन्।।
अग्निहोत्र, सत्रयज्ञ, अत्यधिकं दक्षिणा वाले यज्ञ और उसी प्रकार महादान भी उसके राज्य में सदा चलते रहते थे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।