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शिवभारतम् • अध्याय 1 • श्लोक 46
त्वंगत्तुरंगमखुरक्षुण्णभीमरथीतटः। समुद्यहुन्दुभिध्वानविभ्रमक्षोभितार्णवः ।।
जिसने अपने सरपट दौड़ते घोड़ों के खुरों से भीम नदी के तटीय क्षेत्रों को रौंदा, जिसके दुंदुभी से उठती ध्वनि की लहरों ने समुद्र को हिला दिया,
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