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शिवभारतम् • अध्याय 1 • श्लोक 43
महाराष्ट्र जनपदं महाराष्ट्रस्य भूमिपः। प्रशशास प्रसन्नात्मा निजधर्मधुरंधरः ॥
क्षत्रधर्म धुरिन और हंसमुख ऐसा वह मराठा राजा महाराष्ट्र में शासन कर रहा था।
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