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शिवभारतम् • अध्याय 1 • श्लोक 4
मुच्यन्ते यत्र सर्वेऽपि मुक्तिरेव न मुच्यते। यत्रोपदिशति ब्रह्म तारकं स्वयमीश्वरः ।।
ऐसे उस काशी में तीर्थ विधि करके तथा महादेव के दर्शन करके वह धर्मज्ञ ब्राह्मण पवित्र भागीरथी के तट पर रहने लगा।
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